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Showing posts from July, 2022

पीपल के पेड़ के तने पर मूत्र विसर्जित करना पाप क्यो माना जाता है

 हिन्दू धर्म में पीपल के पेड़ को ब्राह्म माना जाता है तथा पीपल की पूजा-अर्चना देव प्रतिमा की जाती है। इसीलिए पीपल के पेड़ के तने पर पेशाब करना पाप माना जाता है

रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई पूजा में रुद्राक्ष का विशेष महत्व क्यों हैं?

  हिंदू मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से मानी जाती है  कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव से अपने मन को स्थिर करने के लिए घोर तप किया था। तप के दौरान भगवान शिव के भय सा लगा उन्होंने आंखें खोल दी,  जिससे उनके  नेत्र से आंसुओं की बूंदें गिरने लगी जिससे गौड़ देश से लेकर मथुरा,अयोध्या,काशी,लंका,मान्यचल आदि देशों में रुद्राक्ष की उत्पत्ति हो गई उसी समय से रुद्राक्ष देवताओं का भी प्रिय हो गया तथा पूजा में रुद्राक्ष का विशेष महत्व हो गया। भगवान शिव के वरदान के अनुसार जो मनुष्य रुद्राक्ष धारण करता है वह सब को अति प्रिय होता है

12 किसके बजते हैं?

  बात 1739 ईस्वी की है! जब नादिर शाह दिल्ली पर हमला किया और दिल खोलकर लोगों को लुटा !   वह आपने साथ अपार धन-दौलत के साथ-साथ सैकड़ों  हिंदू औरतों को भी अगवा करके ले जा रहा था यह खबर जब सिखों की फौज को लगी तो उन्होंने रात के समय नादिरशाह के काफिले पर छापामार हमला किया और उन स्त्रियों को छुड़ाकर पूरी इज्जत के  सम्मान के साथ उनके घर पहुंचाया उस समय  मुगलों और नवाबों का राज था,वे जब चाहते शहरों से सुंदर स्त्रियों को उठा ले जाते और मजबूर हिंदू कुछ ना कर पाए जाते थे! सिखों ने इस अत्याचार के विरोध कमर कसी देर रात को मुगलों के पड़ाव पर छापामार हमलाा करते और देखते ही देखते  स्त्रियों को शोभा और उनके परिवार को सौंप देते मुगल सेना इन हमलों से परेशान हो गई! यह हमलेेे अक्सर रात 12:00 बजे के आसपास होते थे इसका असर यह हुआ की मुगल सैनिक महलों मेंं भी सोते-सोते घबराकर राात 12:0 बजे उठ जाते और चिल्लाते चिल्लाने लगते बचाओ बचाओ  सिखों आ गए इस पर इस प्रकार सिखों ने अपनी जान पर खेलकर इन इस देश की इज्जत और आबरू को नीलाम होने से बचाया

सायरी ग़ज़ल

जो कहा उसे आरज़ू कहते है  जिसे पाया उसे हसरत कहते है जिसे सोचा उसे ख्वाहिस कहते है जो पुरा ना हुआ उसे सपने कहते है रिश्तो की चमक को किसी गहने की चमक से ना तोलना  ये अनमोल होते है  दिल के रिश्तो को दौलत से ना तोलना  ये बेजोड़ होते है रूठी सी तक़दीर है मेरी किताब के खाली पन्नों सी हाथो की लकीर है मेरी मैं खुद की तलाश क्यू ही करु  जब गुमशुदा सी ज़िंदगी है मेरी सोचा था चाहतो को दिल मे संजोय  फिर कभी उस डगर ना जाऊंगा  जहां सिर्फ दर्द ओर तकलीफ के सिवा कुछ ना मिला मगर ये कमबख्त दिल फिर तैयार है एक नई उड़ान भरने के लिए एक नया घोंसला बनाने के लिए किसी को दिल मे पनाह देने के लिए, कैसे समझाऊ मे इस नादान को जहां पहले हि दर्द का काफिला मिल चुका है वहाँ फिर जाने कि क्यूँ ज़िद करता है जो हस्ती थी मेरी गुलज़ार  वो हस्ती हाथो से फिसल गई गम का दौर कुछ यु आया हमने पलके उठाई और दुनिया ही बदल गई अरमानो की चादर ओढे  कश ये ज़िंदगी का सफर युही चलता रहे कुछ भीगी सी यादे लेकर  काश तुम युही मेरी ज़िंदगी मे रहो चलते चलते जो थम जाए हम उसपल तक काश तुम हमारे रहो

विवाह के समय सात फेरे अग्नि के साक्षी ही क्यों ?

विवाह के अवसर पर अग्नि की परिक्रमा करते हुए वर वधु अग्निदेव सामने सबकी उपस्थिति में सात परिक्रमा करते हुए शपथ लेते हैं कि वे इन फिरे द्वारा एक महान धर्म में बांधते हैं इस संकल्प को निबाह ने और चरीतीर्थ करने में वे कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे! अग्नि के सामने यह रस्म इसलिए पूरी की जाती है !क्योंकि एक और अग्नि जीवन का आधार है तो दूसरी ओर जीवन में गतिशीलता और कार्य की क्षमता तथा शरीर की पुष्टि करने की क्षमता भी कुछ अग्नि द्वारा ही आती है अतः अग्नि के समक्ष फेरे लेने का अर्थ है परमात्मा के समक्ष फेरे लेना

आत्मबल कैसे जगाए

प्रतिदिन प्रात काल मैं जल्दी उठकर सूर्य उदय से पहले स्नान करके ! स्वच्छ पवित्र स्थान में आसन बिछाकर पूर्व मुख्य होकर पदआसन या  सुखासन मैं बैठ जाओ ! शांत प्रसन्न वृत्ति धारण करो ! मन मैं कठोर भावना करो कि मैं प्रकृति निर्मित इस सूक्ष्म शरीर के सब अभावों को पार करके, सब मैं दुर्बलता आदि छुड़ाकर आत्म-महिमा मैं जाकर ही रहूंगा आंखें आधी खुली आदि बंद रखो फिर फेफड़ों को खूब स्वास भरो और भावना  करो कि स्वास के साथ मैं सूर्य का दिव्य आज भीतर भर रहा हूं स्वास को यथाशक्ति अंदर टकराए रखो फिर ओम....का लंबा उच्चारण करते हुए स्वास को धीरे धीरे छोड़ते जाओ  स्वास खाली होने के बाद तुरंत स्वास ना ले ! यथाशक्ति बिनाा स्वास रहे और भीतर ही भीतर हरि ओम हरि ओम का मानसिक जप करो फिर से फेफड़ों में खूब समाज भरो और पूर्व कर प्रीति से यथा शक्ति अंदर टकराकर बाद में धीरे-धीरे छोड़ते हुए जिस हरि की शरण जाने से पाप ताप  हो जाता है ऐसे पावन हरि ओम मंत्र का गुजन करो करके मन करके शांत शांत हो जाओ अब प्रयास छोड़ दो व्यक्तियों को आकाश की ओर फैला दो! आकाश के अंदर पृथ्वी पर अनेक देश अनेक समुद्र एवं अनेक लो...

गाय का दूध पवित्र क्यों है?

हिंदू धर्म में गाय के दूध को गंगाजल की भांति पवित्र माना जाता है आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो गाय को मां कहा गया है गौ माता गाय के दूध में रोबो से रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता होती है और उसमें प्रोटीन और विटामिनों की प्रचुर मात्रा रहती है सुपाच्य होने से छोटे बच्चों को मां के दूध के बाद गाय का दूध ही दिया जाता है

माला में 108 दाने ही क्यों होते हैं?

प्राचीन काल से इज्जत करना भारतीय पूजा उपासना पद्धति का एक आभित्र अंग रहा है जब के लिए माला की जरूरत होती है जो रुद्राक्ष तुलसी वैजयंती सफी टिक मोतियों नागों से बनी हो सकती है इसमें रुद्राक्ष की माला को जब के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इसमें कीर्तन ऊना शक्ति के अलावा विद्युतीय और चुंबकीय शक्ति भी पाई जाती है नवग्रह तथा 12 राशियों 9 गुण 12*9=108 हुए इसी प्रकार 27 नक्षत्र तथा प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण 27 गुणों 4=108 इसीलिए माला में 108 दाने होते हैं

हाथ मिलाना हिंदू धर्म अनुसार अनुचित क्यों है ?

हिंदू मान्यता के अनुसार हाथ मिलाने से अपने शरीर से संचित शक्ति का कुछ अंश दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है सिर पर हाथ रखने से एक विशेष प्रक्रिया द्वारा गुरु लोक शिष्यों पर 'शक्तिपात' करते थे हाथ मिलाने की पश्चात पश्चात प्रात आंख आने जैसी संक्रामक को भी फैल आती है और कोरोने जैसी बीमारी भी आकर्षित होती है 

क्यों करते हैं हिंदू मूर्ति पूजा ?

 जिन व्यक्तियों का मन चंचल है और वह एकाग्र हो ईश्वर का ध्यान नहीं कर पाते वह मूर्ति पूजा की सहायता से अपने मन पर संयम रखने का प्रयास करते हैं हिंदू धर्म के प्रारंभ में मूर्ति पूजा नहीं थी किंतु क्रमशाह यह इसमें शामिल होती गई और आज अपने चरण चरम पर है यदि आप ईश्वर को सच्चे हृदय से प्रेम पूर्वक उसे पूजा तू आवश्यकता आपको नहीं है परंतु यदि आपका मन चंचल है तो हिंदू धर्म के शगुन मत के अनुसार मूर्ति पूजा बैग है बा निर्गुण मत में नहीं है सिख और इस्लाम सहित अनेक धर्म में मूर्ति पूजा निषेध है और इसे पाप माना जाता है