जो कहा उसे आरज़ू कहते है
जिसे पाया उसे हसरत कहते है
जिसे सोचा उसे ख्वाहिस कहते है
जो पुरा ना हुआ उसे सपने कहते है
रिश्तो की चमक को किसी गहने की चमक से ना तोलना
ये अनमोल होते है
दिल के रिश्तो को दौलत से ना तोलना
ये बेजोड़ होते है
रूठी सी तक़दीर है मेरी
किताब के खाली पन्नों सी
हाथो की लकीर है मेरी
मैं खुद की तलाश क्यू ही करु
जब गुमशुदा सी ज़िंदगी है मेरी
सोचा था चाहतो को दिल मे संजोय
फिर कभी उस डगर ना जाऊंगा
जहां सिर्फ दर्द ओर तकलीफ के सिवा कुछ ना मिला
मगर ये कमबख्त दिल
फिर तैयार है एक नई उड़ान भरने के लिए
एक नया घोंसला बनाने के लिए
किसी को दिल मे पनाह देने के लिए,
कैसे समझाऊ मे इस नादान को
जहां पहले हि दर्द का काफिला मिल चुका है
वहाँ फिर जाने कि क्यूँ ज़िद करता है
जो हस्ती थी मेरी गुलज़ार
वो हस्ती हाथो से फिसल गई
गम का दौर कुछ यु आया
हमने पलके उठाई और
दुनिया ही बदल गई
अरमानो की चादर ओढे
कश ये ज़िंदगी का सफर
युही चलता रहे
कुछ भीगी सी यादे लेकर
काश तुम युही मेरी ज़िंदगी मे रहो
चलते चलते जो थम जाए हम
उसपल तक काश तुम हमारे रहो
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